द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता (mass-energy equivalence):E=mc2

                     द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता

           (  Mass-energy equivalence. )

                           (E=mc2)

अल्बर्ट आइंस्टीन
Albert Einstein
बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ तक यह विस्वास किया जाता था कि द्रव्य ऊर्जा का अपना स्वतंत्र अस्तित्व होता  है इनके बीच परस्पर कोई सम्बन्ध नहीं है। साथ ही साथ जिस प्रकार ब्रह्माण्ड की ऊर्जा संरक्षित है थी उसी प्रकार द्रव्य भी संरक्षित है।


     पहली बार जर्मन वैज्ञानिक ,भौतिकविद अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रदर्शित किया कि द्रव्य व ऊर्जा एक दुसरे के तुल्य हैं तथा द्रव्य को ऊर्जा एवं ऊर्जा को द्रव में परिवर्तित किया जा सकता है।
      उन्होंने द्रव्य को उर्जा मे परिवर्तित करने के लिए एक सरल समीकरण दिया जिसे द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता सम्बन्ध कहते हैं। जो की निम्न प्रकार है...
                       E= MC square
जहाँ e = energy, M= mass , c=प्रकाश की तीव्रता है।
     अथार्थ M किग्रा द्रव्यमान के विलुपत होने पर उसके संगत ऊर्जा E का प्रादुर्भाव होगा। इस समीकरण में (C=3×10पर घात 8 मीटर /सेकंड )निर्वात में प्रकाश का वेग है।
   अतः यदि 1 kg द्रव्य विलुप्त हो ,तो उसके संगत 9×10000000000000000जुल ऊर्जा उत्तपन्न होगी।
   अल्बर्ट आइंस्टीन का जीवन परिचय जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें...


आइंस्टीन के जीवन परिचय







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